पंजीकृत सेवा ट्रस्ट, पारदर्शिता एवं समर्पण के मूल सिद्धांतों पर आधारित।
समाज के अंतिम व्यक्ति तक सेवा, शिक्षा एवं स्वास्थ्य की ज्योति पहुंचाना।
नए गोठ (सिंध) की प्राचीन गद्दी से सतना तक — उदासीन संत परंपरा की गौरवशाली गाथा।
श्री संतधाम उदासीन आश्रम, सतना (मध्य प्रदेश) उदासीन संप्रदाय की प्राचीन एवं गौरवशाली आध्यात्मिक परंपरा का एक पवित्र केंद्र है। यह आश्रम उदासीनाचार्य जगद्गुरु श्रीचंद जी महाराज की शिक्षाओं एवं उदासीन संत परंपरा के आदर्शों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य मानव समाज में आध्यात्मिक जागृति, सेवा, प्रेम, करुणा एवं मानव कल्याण का प्रसार करना है।
जगद्गुरु श्रीचंद जी महाराज उदासीन संप्रदाय के प्रवर्तक एवं महान आध्यात्मिक संत थे। उनका जन्म 9 सितंबर 1494 को श्री गुरु नानक देव जी एवं माता सुलक्खनी जी के घर ननकाना साहिब (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ। उन्होंने अपना जीवन ईश्वर-भक्ति, योग, वैराग्य एवं मानव सेवा को समर्पित किया।
Jagadguru Shri Chand Ji Maharaj was the founder of the Udasin Sampradaya, born on 9 September 1494 to Sri Guru Nanak Dev Ji and Mata Sulakhni Ji at Nankana Sahib. He dedicated his life to devotion, meditation, renunciation, and selfless service, spreading the timeless values of compassion, equality, and spiritual wisdom that guide the tradition to this day.
श्री संतधाम आश्रम की स्थापना पूज्य बाबा संतदास जी द्वारा वर्तमान पाकिस्तान के नए गोठ (जिला ललकाना) में की गई थी। उन्होंने सत्संग, आध्यात्मिक साधना एवं मानव सेवा के माध्यम से उदासीन संप्रदाय की शिक्षाओं का प्रचार-प्रसार किया। देश के विभाजन के पश्चात उन्होंने आश्रम की पावन गद्दी अपने योग्य शिष्य पूज्य बाबा चेतनदास जी को सौंपी।
Pujya Baba Santdas Ji Maharaj founded Shri Santdham Ashram in present-day Pakistan, spreading the teachings of the Udasin Sampradaya through Satsang, spiritual practice, and selfless service. Following the Partition of India, he entrusted the sacred Gaddi to his successor, Pujya Baba Chetan Das Ji Maharaj.
देश के विभाजन के पश्चात, सन् 1961 में पूज्य बाबा चेतनदास जी ने गुरु परंपरा की पावन गद्दी संभाली और सतना (मध्य प्रदेश) में श्री संतधाम आश्रम की स्थापना कर आध्यात्मिक एवं सामाजिक सेवा के कार्यों को नई दिशा प्रदान की।
Following the Partition of India, Pujya Baba Chetan Das Ji Maharaj assumed the sacred Gaddi in 1961 and established Shri Santdham Ashram in Satna, Madhya Pradesh, laying the foundation for its spiritual and humanitarian activities.
पूज्य महंत स्वामी जियालदास जी महाराज श्री संतधाम आश्रम के तृतीय गद्दीनशीन थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन ईश्वर भक्ति, सत्संग, आध्यात्मिक साधना एवं मानव सेवा को समर्पित किया। सन् 1991 में लगभग 84 वर्ष की आयु में वे ब्रह्मलीन हुए।
Pujya Mahant Swami Jiyal Das Ji Maharaj was the third spiritual head of Shri Santdham Ashram, dedicating his entire life to devotion, spiritual practice, Satsang, and selfless service. In 1991, at the age of 84, he attained Mahasamadhi.
पूज्य महंत स्वामी ईश्वरदास जी उदासीन महाराज श्री संतधाम उदासीन आश्रम के वर्तमान पीठाधीश्वर एवं गद्दीनशीन हैं। उनके सान्निध्य में आश्रम श्रद्धालुओं के लिए भक्ति, संस्कार, आध्यात्मिक ज्ञान एवं निस्वार्थ सेवा का एक प्रेरणादायी केंद्र बना हुआ है।
Pujya Mahant Swami Ishwar Das Ji Udasin is the present Peethadheeshwar and Gaddinashin of Shri Santdham Udasin Ashram, guiding the Ashram's spiritual, religious, and humanitarian activities through Satsangs, religious ceremonies, and community welfare programs.
उदासीन संप्रदाय के प्रवर्तक — ननकाना साहिब में जन्म, संप्रदाय की स्थापना।
पूज्य बाबा संतदास जी द्वारा नए गोठ (सिंध, अब पाकिस्तान) में उदासीन गद्दी की स्थापना।
बाबा चेतनदास जी गद्दीनशीन हुए और सतना में श्री संतधाम उदासीन आश्रम की स्थापना की।
गद्दीनशीन होकर संपूर्ण जीवन धर्म, सत्संग एवं समाज सेवा हेतु समर्पित किया।
वर्तमान पीठाधीश्वर — सेवा, उपदेश एवं सत्संग से समाज का निरंतर मार्गदर्शन।

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच, दवा एवं राहत सामग्री वितरण।
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मंगला आरती एवं सूर्य वंदना के साथ दिवस का शुभारंभ।
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी जय जगदीश हरे। भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
श्री संतधाम, सिंधी कैंप गोल रोड, सिंधी कॉलोनी, सतना, मध्य प्रदेश 485005
+91 98937 36161
seva@santdhamsatna.org
कार्यालय समय: प्रातः 9 से सायं 7